Gehu Aur Arahar Me Rog : बेमौसम बारिश में गेहूं और अरहर की फसल को इस तरह रखें रोगों से दूर

Gehu Aur Arahar Me Rog : इन दिनों मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बेमौसम बारिश का दौर चल रहा है। यह बेमौसम बारिश किसानों को फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान कर रही है। इससे फसलों को कई तरह से नुकसान पहुंच रहा है या पहुंच सकता है। यह बात किसान भी जानते हैं। इसलिए वे अपनी फसल को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले रहे हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र रीवा के वैज्ञानिकों से भी किसान इस तरह की सलाह ले रहे हैं। इसी तारतम्य में दो किसानों ने अपनी अरहर और गेहूं की फसल को लेकर मार्गदर्शन मांगा है। उन्हें कृषि वैज्ञानिकों ने उपयुक्त सलाह दी है। इस सलाह को अमल में लाकर अन्य किसान भी अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं और अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

गेहूं को संभावित रोग से ऐसे बचाएं (Gehu Aur Arahar Me Rog)

एक किसान द्वारा इस असमय वर्षा से गेहूं की फसल को संभावित रोगों से बचाने को लेकर सलाह मांगी गई थी। इस पर कृषि विज्ञान केंद्र रीवा के वैज्ञानिक डॉ. केएस बघेल ने सलाह दी है कि असमय वर्षा होने के कारण गेहूं की फसल को संभावित रोगों के प्रभाव से बचाने हेतु नीचे दी गई 3 में से किसी भी एक फफूंदनाशी का छिड़काव करवाना अच्छा रहेगा।

इन फफूंदनाशी में टेबुकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल और हेक्साकोनाजोल शामिल हैं। टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत का 25 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर में, प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत का 20 मिलीमीटर प्रति 15 लीटर में और हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत का 30 मिलीमीटर प्रति 15 लीटर में उपयोग किया जा सकता है।

इन तीनों में से किसी एक का चुनाव कर प्रयोग किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. बघेल ने यह सलाह भी दी है कि एक एकड़ में कम से कम 200 लीटर पानी का उपयोग जरुर करें।

अरहर की फसल के लिए यह सलाह (Gehu Aur Arahar Me Rog)

एक किसान द्वारा पूछा गया था कि अरहर के पौधों में फूल से फल आने की प्रक्रिया चालू है। इस बीच मौसम करवट बदल रहा है, वर्षा हो रही है। इससे पौधों को कोई दिक्कत तो नहीं है या कुछ उपचार करना पड़ेगा। फल में पैदावार अच्छी होने में कोई अवरोध तो नहीं आएगा।

इस पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सीजे सिंह ने सलाह दी है कि जो बारिश अभी हो रही है, इसका प्रभाव यह हो सकता है कि कुछ फूल झड़ जाएं। इसका कारण यह है कि जब वर्षा का पानी मृदा (मिट्टी) पर पड़ता है तब मृदा में उपस्थित नाईट्रोजन वर्षा के पानी में घुलकर पौधों को मिलने लगती है।

इसका असर यह होता है कि पौधे में बढ़वार प्रारंभ हो जाती है तथा बढ़वार होने के कारण उत्पादन की प्रक्रिया में कुछ कमी आ सकती है। इसके अलावा कुछ फूल झड़ भी सकते हैं।

मौसम में नमी बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर इल्ली तथा रोग का प्रकोप भी देखा जा सकता है। अत: फसल की सतत निगरानी करते रहना चाहिये। यदि कोई समस्या आती है तो तुरंत कृषि वैज्ञानिकों को सूचित करें ताकि इसकी रोकथाम करने की वैज्ञानिक सलाह आपको दी जा सके।

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